आज नवरात्रि का पहला दिन है. इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है जिससे जीवन में स्थिरता आती है| प्रदेश के मंदिरों और शक्तिपीठों में श्रद्धालु बड़ी संख्या में देवियों के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। कई शक्तिपीठों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लाइनें लगी रहीं। इस दौरान मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पूरा पालन सुनिश्चित किया गया। मंदिरों में सुरक्षा और सेनेटाइजेशन के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।

वही हिमाचल में स्थित ज्वालाजी में श्रद्धालुओं को पर्ची सिस्टम से दर्शन करवाए जा रहे हैं। मंदिर में सुबह से ही माता के दर्शन के लिए श्रद्धालु लाइनों में लगे रहे। शक्तिपीठ के कपाट सुबह करीब 6:00 बजे खुले और रात 10:00 बजे तक दर्शन करवाए जाएंगे। न तो हवन-यज्ञ होंगे, न प्रसाद ले जाने और वितरित करने की इजाजत है। श्रद्धालुओं को एलईडी स्क्रीन पर आरती दिखाने की व्यवस्था की गई है।

चामुंडा नंदीकेश्वर धाम में श्रद्धालुओं ने सुबह 5:00 बजे से एसओपी के तहत मास्क लगाकर सोशल डिस्टेंस बनाकर दर्शन किए। घंटी बजाने पर प्रतिबंध है। लंगरों पर भी रोक है। वहीं, बज्रेश्वरी मंदिर में श्रद्धालुओं ने मंदिर के गर्भ गृह में जाकर माता के दर्शन किए।

प्रसिद्ध शक्तिपीठों सहित प्रदेश के मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़

                                   

आज नवरात्रि का पहला दिन है. इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है जिससे जीवन में स्थिरता आती है| प्रदेश के मंदिरों और शक्तिपीठों में श्रद्धालु बड़ी संख्या में देवियों के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। कई शक्तिपीठों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लाइनें लगी रहीं। इस दौरान मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पूरा पालन सुनिश्चित किया गया। मंदिरों में सुरक्षा और सेनेटाइजेशन के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।

वही हिमाचल में स्थित ज्वालाजी में श्रद्धालुओं को पर्ची सिस्टम से दर्शन करवाए जा रहे हैं। मंदिर में सुबह से ही माता के दर्शन के लिए श्रद्धालु लाइनों में लगे रहे। शक्तिपीठ के कपाट सुबह करीब 6:00 बजे खुले और रात 10:00 बजे तक दर्शन करवाए जाएंगे। न तो हवन-यज्ञ होंगे, न प्रसाद ले जाने और वितरित करने की इजाजत है। श्रद्धालुओं को एलईडी स्क्रीन पर आरती दिखाने की व्यवस्था की गई है।

चामुंडा नंदीकेश्वर धाम में श्रद्धालुओं ने सुबह 5:00 बजे से एसओपी के तहत मास्क लगाकर सोशल डिस्टेंस बनाकर दर्शन किए। घंटी बजाने पर प्रतिबंध है। लंगरों पर भी रोक है। वहीं, बज्रेश्वरी मंदिर में श्रद्धालुओं ने मंदिर के गर्भ गृह में जाकर माता के दर्शन किए।

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